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DURGA BHAWANI ASTROLOGICAL SERVICES PVT. LTD

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इस वीडियो के माध्यम से बताया गया है कि फिरोज़ा रत्न की क्या-क्या विशेषताएं होती हैं ।

यह कोई आम रत्न नहीं है इस रत्न के प्रभाव से बुरे वक्त को अच्छे वक्त में परिवर्तित किया जा सकता है यह मनुष्य के भाग्य को बदलने में पूर्णतय: सक्षम है । इस वीडियो के माध्यम से हम जानेंगे फिरोज़ा रत्न का संपूर्ण परिचय एवं स्वरूप । क्या है इससे होने वाले अनेकों बहुमूल्य फायदे। कैसे करें पहचान की हमारे द्वारा धारण किया जाने वाला फिरोज़ा रत्न असली है या नहीं ? कैसा करना चाहिए फिरोज़ा रत्न को धारण ? किस ग्रह के लिए करना चाहिए फिरोजा रत्न को धारण ? कौन करें इस रत्न को धारण और कौन नहीं ? यह संपूर्ण जानकारी इस वीडियो के माध्यम से दर्शाई गई है। इस रत्न के प्रति ऐसी धारणा है देव गुरु बृहस्पति के स्वरूप गुरु ग्रह को मजबूत करने हेतु इसे धारण किया जाता है तथा इसे धारण करने के पश्चात बृहस्पति के श्रेष्ठ फल आपको प्राप्त होते हैं वहीं कुछ लोगों का मत है कि इसे बृहस्पति एवं शनि दोनों के लिए धारण किया जाता है कुछ लोग इसे शुक्र के लिए धारण करते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे बुध के लिए भी धारण करते हैं। ऐसा यह चमत्कारी रत्न देता है आपको निम्नलिखित फायदे:- 1:- प्रभावी व्यक्तित्व 2 :- ऐक्टिंग 3 :- मॉडलिंग , 4 :- डांसिंग 5 :- सिंगिंग 6 :- कवि , लेखक 7 :- डॉक्टर 8 :- इंजीनियरिंग 9 :- व्यापार 10 :- शेयर बाजार में मुनाफा 11 :- वैवाहिक जीवन हेतु अत्यंत लाभदायक 12 :- परिवार में हो रही अनबन को रोकता है जैसे अनेकों बहुमूल्य फायदे ।

इस वीडियो के माध्यम से बताया गया है कि फिरोज़ा रत्न की क्या-क्या विशेषताएं होती हैं ।  post imageRead full post

इस वीडियो के माध्यम से बताया गया है कि पुखराज रत्न की क्या विशेषताएं होती हैं ।

इस वीडियो के माध्यम से हम जानेंगे पुखराज रत्न का संपूर्ण परिचय एवं स्वरूप । क्या है इससे होने वाले अनेकों बहुमूल्य फायदे। कैसे करें पहचान की हमारे द्वारा धारण किया जाने वाला पुखराज असली है या नहीं ? कौन से हैं पुखराज के उपरत्न ? कैसा करना चाहिए पुखराज रत्न को धारण ? कौन करें इस रत्न को धारण और कौन नहीं ? यह संपूर्ण जानकारी इस वीडियो के माध्यम से दर्शाई गई है। इस रत्न के प्रति ऐसी धारणा है देव गुरु बृहस्पति के स्वरूप गुरु ग्रह को मजबूत करने हेतु इसे धारण किया जाता है तथा इसे धारण करने के पश्चात बृहस्पति के श्रेष्ठ फल आपको प्राप्त होते हैं 😇 इसके सहित यह आपको देता है :- 1:- प्रभावी व्यक्तित्व 2 :- व्यवहार में मिठास 3 :- क्रोध में शान्ति , 4 :- आधे सर के दर्द से मुक्ति 5 :- इन्फ्लूएंजा रोग से मुक्ति 6 :- कनपड़े आदि रोगों से मुक्ति 7 :- अकारण की बीमारियों से छुटकारा 8 :- रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि 9 :- गुप्त शत्रु पर विजय 10 :- मोटापा कंट्रोल करता है 11 :- संतान प्राप्ति हेतु अत्यंत लाभदायक 12 :- समय से पूर्व आने वाले बुढ़ापे को आश्चर्यजनक रूप से रोकता है। जैसे अनेकों बहुमूल्य फायदे ।

इस वीडियो के माध्यम से बताया गया है कि पुखराज रत्न की क्या विशेषताएं होती हैं । post imageRead full post

गायत्री मंत्र की अधिक महिमा क्यों ?

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सविर्तुवरेण्यं भर्गो  देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।  गायत्री मन्त्र को अनादि मन्त्र माना गया है । पुराणों के अनुसार सृष्टि रचयिता ब्रह्माजी को गायत्री मंत्र आकाशवाणी से प्राप्त हुआ था । सृष्टि सृजन की क्षमता भी उन्हें गायत्री मंत्र की साधना से ही प्राप्त हुई थी । ब्रह्माजी ने इसकी व्याख्या में ही चार वेदों की रचना कर दी थी । इसी कारण गायत्री को वेदमाता भी कहा जाता है । ऐसे ही कई प्रकार से है गायत्री मंत्र की महिमा एवं विस्तार गायत्री मंत्र कर सकता है आपके जीवन में कई प्रकार के सु:खों को उजागर जानिए गायत्री महामंत्र की महिमा का पूरा विस्तार इस ब्लॉग के माध्यम से नीचे दिए गए LEARN MORE बटन पर क्लिक करके

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गुरु - दीक्षा क्यों ली जाती है ?

नमस्कार मित्रों ,                         मैं जितेन्द्र सकलानी एक बार पुन: प्रस्तुत हुआ हूँ आप लोगो के समक्ष अपने नए ब्लॉग के साथ अपने धर्मग्रंथो पर आधारित कुछ बताये गए  वाक्य, अथवा नियमो के विषय में कुछ जानकरी लेकर....  आपने यह तो अवश्य ही सुना होगा कि बिना गुरु के ज्ञान नहीं हो सकता जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है जीवन की प्रथम गुरु मां को माना गया है तत्पश्चात जीवन में हर पथ पर जो हमें नया ज्ञान प्रदान करता है वह हमारे गुरु की संज्ञा पाता है गुरु से ज्ञान रूपी दीक्षा ली जाती है इसे गुरु दीक्षा कहा गया है परंतु क्या आपने सोचा है कि गुरु दीक्षा लेना अनिवार्य क्यों है आइए जानते हैं आपके इस प्रश्न का उत्तर इस ब्लॉग के माध्यम से........। इस ब्लॉग को पूरा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए Learn More बटन पर क्लिक करें

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जीवन में गुरु का महत्व क्यों है ?

नमस्कार मित्रों ,                         मैं जितेन्द्र सकलानी एक बार पुन: प्रस्तुत हुआ हूँ आप लोगो के समक्ष अपने नए ब्लॉग के साथ अपने धर्मग्रंथो पर आधारित कुछ बताये गए  वाक्य, अथवा नियमो के विषय में कुछ जानकरी लेकर....  शास्त्रों में गुरु की महिमा का वर्णन जरूर पढ़ने को मिलता है कभी ना कभी अपने बड़े बुजुर्गों द्वारा आपने भी गुरु की महिमा का वर्णन तो अवश्य ही सुना होगा पुराने जमाने के लोग कहा करते थे कि जीवन में गुरु बनाना अति आवश्यक होता है परंतु क्या आपने कभी सोचा है कि जीवन में गुरु का महत्व क्यों आवश्यक है ? आइए जानते हैं आपके इन्हीं प्रश्नों का उत्तर इस ब्लॉग के माध्यम से इस ब्लॉग को विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दिए गए Learn More बटन पर क्लिक करें

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भजन - कीर्तन और प्रार्थना क्यों की जाती है ?

हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि-   भजनस्य लक्षणं रसनम् अर्थात् अंतरात्मा का रस जिसमें उभरे , उसका नाम है - भजन । हृदय में जो आनंद वस्तु , व्यक्ति या भोज - सामग्री के बिना भी आता है . वही भजन का रस है ।  रामचरितमानस में तुलसीदासजी ने कहा है कि जो साधक भगवान् का विश्वास पाने के लिए भजन करता है , प्रभु अपनी अहैतुकी कृपा से उसे अपना विश्वास प्रदान करके उसके जीवन को सफल कर देते हैं ।  पद्मपुरण के उत्तरखंड में कहा गया है- नाहं वसामि वैकुंठे योगिनां हृदये न च ।  मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद ।  ( पद्मपुराण / उत्तराखंड 14/23 )  अर्थात्  हे नारद ! मैं न तो बैकुंठ में ही रहता हूं और न योगियों के हृदय में ही रहता हूं । मैं तो वहीं रहता हूं , जहां प्रेमाकुल होकर मेरे भक्त मेरे नाम का कीर्तन किया करते हैं ।  इस ब्लॉग को और अधिक विस्तार में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए LEARN MORE BUTTON पर क्लिक करें

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कीर्तन में ताली क्यों बजाते हैं ?

श्रीरामकृष्ण देव भी कहा करते थे कि ताली बजाकर प्रात: काल और सायंकाल हरिनाम भजा करो । ऐसा करने से सब पाप दूर हो जाएंगे । जैसे पेड़ के नीचे खड़े होकर ताली बजाने से पेड़ की सब चिड़ियां उड़ जाती हैं , वैसे ही ताली बजाकर हरिनाम लेने से देहरूपी वृक्ष से अविद्यारूपी चिड़ियां उड़ जाती हैं । प्राचीन काल में मंदिरों में पूजा , आरती , भजन - कीर्तन आदि में समवेत रूप से ताली बजाने की परंपरा रही है , जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का एक अत्यंत उत्कृष्ट साधन है । यदि आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़ना चाहते हैं नीचे दिए गए learn more button पर क्लिक करें !

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प्रातः जागते ही भू - वंदना क्यों की जाती है ?

नमस्कार मित्रों ,                         मैं जितेन्द्र सकलानी एक बार पुन: प्रस्तुत हुआ हूँ आप लोगो के समक्ष अपने नए ब्लॉग के साथ अपने धर्मग्रंथो पर आधारित कुछ बताये गए  वाक्य, अथवा नियमो के विषय में कुछ जानकरी लेकर.... आपने कभी ना कभी हमारे बड़े बुजुर्गों को यह कहते तो अवश्य ही सुना होगा कि सुबह उठते ही धरती पर पैर नहीं रखना चाहिए बल्कि पैर रखने से पहले धरती माता को प्रणाम करना चाहिए यहां तक की पूजन पाठ के दौरान भी आपने देखा होगा पूजन शुरू होने से पहले धरती माता को प्रणाम किया जाता है शास्त्रों में धरती को भी माता का दर्जा दिया गया है परंतु किस आधार पर किया जाता है माता धरती का पूजन आइए जानते हैं एस ब्लॉक के द्वारा। सवेरे बिस्तर से उतरने के पहले पृथ्वी माता का अभिवादन करना चाहिए , क्योंकि हमारे पूर्वजों ने इसका विधान बनाकर इसे धार्मिक रूप इसलिए दिया , ताकि हम धरती माता के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट कर सकें ।  इस ब्लॉग को पूरा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए learn more बटन पर क्लिक करें

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प्रात: हाथों के दर्शन क्यों ?

शास्त्रों में प्रात: जागते ही बिस्तर पर बैठे - बैठे ही सबसे पहले हथेलियों के दर्शन करने को कहा गया है ।  दर्शन के दौरान निम्न श्लोक का उच्चारण करना चाहिए-  कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।  करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥

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ब्रह्ममुहूर्त में उठने का निर्देश क्यों ?

रात्रि के अन्तिम प्रहर का तीसरा भाग ब्रह्ममुहूर्त कहलाता है । आयुर्वेद के अनुसार प्रात: 4 बजे से 5.30 बजे तक का समय ब्रह्ममुहूर्त कहलाता है ।                ब्रह्ममुहूर्त शब्द ब्रह्मी से बना है । शास्त्रों में ब्रह्मीं ज्ञान की देवी सरस्वती को कहा गया है । यही कारण है कि प्राचीन गुरुकुलों में आचार्य ब्रह्ममुहूर्त में ही अपने शिष्यों को वेदों का अध्ययन कराते थे । आज भी विश्व के प्रसिद्ध विद्वान , विचारक और साधक ब्रह्ममुहूर्त में उठकर अपने दैनिक क्रिया - कलापों को करते हैं ।  ऋग्वेद ( 1/125/1 ) में कहा गया है-  प्रातारत्नं प्रातरित्वा दधाति तं चिकित्वान्प्रतिगृह्यानिधत्ते ।  तेन प्रजां वर्धयमान आयू रायस्पोषेण सचेत सुवीरः ॥  अर्थात् ब्रह्ममुहूर्त में उठने वाला व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य को प्राप्त करता है । अत : बुद्धिमान व्यक्ति इस अमूल्य समय को व्यर्थ नहीं करते । ब्रह्ममुहूर्त में उठने वाला व्यक्ति सुखी , स्वस्थ , पुष्ट , बलवान , वीर और दीर्घायु होता है । इस विषय में और अधिक जानकारी हेतु नीचे दिए गए learn more बटन पर क्लिक करें।

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आप सभी लोगों ने अपने जीवन काल में कभी ना कभी जप तो किया ही होगा और जिन्होंने जप नहीं किया है उन्ह…

आप सभी लोगों ने अपने जीवन काल में कभी ना कभी जप तो किया ही होगा और जिन्होंने जप नहीं किया है उन्होंने जप होते हुए देखा तो अवश्य ही होगा जिन्होंने जप होते हुए नहीं देखा उन्होंने अपने जीवन काल में माला को तो अवश्य ही देखा होगा और गौर किया होगा की माला में 108 दाने होते हैं जिन्हें मनके कहा जाता है परंतु क्या आपने कभी सोचा है की माला में 108 मनके ही क्यों होते हैं ? तो आइए जानते हैं आपके इस प्रश्न का उत्तर इस ब्लॉग के माध्यम से- नीचे दिए गए learn more बटन पर क्लिक कर के

आप सभी लोगों ने अपने जीवन काल में कभी ना कभी जप तो किया ही होगा और जिन्होंने जप नहीं किया है उन्ह… post imageRead full post

देवी देवताओं को पूजा पाठ में नारियल क्यों चढ़ाया जाता है ?

मित्रों यदि आप कभी कंही किसी भी हिन्दू मंदिर में दर्शन करने गए होंगे तो आपने एक चीज पर जरूर गौर किया होगा की वंहा उस मंदिर में प्रसाद के तौर पर चढाने के लिए नारियल अवश्य ही मिला होगा ! पर क्या हिन्दू मंदिर में उस नारियल चढाने की परम्परा को देख कर आपके मन में भी कभी यह ख्याल आया है की आखिर मंदिरों में देवी देवताओं को पूजा पाठ में नारियल क्यों चढ़ाया जाता है ? अगर आपके मन में भी आया है यह सवाल तो जवाब लेकर मैं उपस्थित हूँ आइये जानते हैं - इस ब्लॉग के माध्यम से learn more बटन पर क्लिक कर के

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