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DURGA BHAWANI ASTROLOGICAL SERVICES PVT. LTD

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दुर्गा भवानी ज्योतिष केंद्र के द्वारा के ज्योतिष के दरबार का आयोजन किया जा रहा है जिस में आप अपनी…

दुर्गा भवानी ज्योतिष केंद्र के द्वारा के ज्योतिष के दरबार का आयोजन किया जा रहा है जिस में आप अपनी कुंडली दिखा कर अपने भविष्य के विषय में सलहा ले सकते हैं वो भी बिना किसी निश्चित शुल्क के यथोचित दक्षिणा देकर अधिक जानकारी के लिए call now पर क्लिक कर के अपनी बुकिंग दर्ज़ करवाएं !

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अभिमंत्रित यंत्रों के प्रयोग से भाग्योदय, कार्य करने की क्षमता में वृद्धि, अशुभ ग्रहों की शांति औ…

अभिमंत्रित यंत्रों के प्रयोग से भाग्योदय, कार्य करने की क्षमता में वृद्धि, अशुभ ग्रहों की शांति और शुभ ग्रहों के प्रभाव में वृद्धि करके जीवन को सुखमय और समृद्धिशाली बनाया जा सकता है.

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खण्डग्रास 🌙चन्द्र ग्रहण साल 2021 का आखिरी चंद्र ग्…

खण्डग्रास 🌙चन्द्र ग्रहण साल 2021 का आखिरी चंद्र ग्रहण 19 नवंबर 2021 दिन शुक्रवार को पड़ेगा। भारत में यह दोपहर बाद 2.34 बजे अपने चरम पर होगा। इस वक्त धूप होने कारण इसे अपनी आंखों से देखने के चांस कम ही है। हालांकि यह भी पूरे भारत में नहीं दिखेगा। ज्योतिष के अनुसार, इस बार चंद्र ग्रहण वृषभ राशि और कृत्तिका नक्षत्र में पड़ेगा। ऐसे में इस राशि में जन्म लेने वाले जातकों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत होगी। चंद्र ग्रह कर्कराशि का स्वामी भी है। इसका असर सभी राशि के जातकों में देखने को मिलता है क्योंकि चंद्र मन का कारक होता है। इस चंद्र ग्रहण का किन-किन राशियों पर और क्या असर होगा यह भी जानना जरूरी है, लेकिन इससे पहले जानिए चंद्र ग्रहण कहां-कहां दिखाई पड़ेगा। 🌙चन्द्र ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा? खगोलशास्त्रितयों के अनुसार, इस बार का चंद्र ग्रहण आशिंक चंद्र ग्रहण होगा। 19 नवंबर को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण भारत के कुछ ही हिस्सों खासकर पूर्वोत्तर के राज्यों में देखा जा सकेगा। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी एशिया, उत्तर अफरीका व दक्षिण अफ्रीका और यूएसए/दक्षिण अमेरिका में देखा जा सकेगा। भारतीय समय के अनुसार, चंद्र ग्रहण दोपहर 12.48 बजे शुरू होगा और 4.17 बजे समाप्त होगा। चंद्र ग्रहण का चरम दोपहर बाद 2.34 बजे देखने को मिलेगा।. 🌙चन्द्र ग्रह का राशियों पर असर और उपाय: ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली में मन का कारक चंद्र यदि निर्बल हो, शत्रु के क्षेत्र में हो, नीच का हो या शत्रु के नक्षत्र में हो तो दूषित कहलाता है। चंद्रमा मन का कारक होता है। इसलिए, मन की नकारात्मकता दूर करने के लिए चंद्र से जुड़े उपाय किये जा सकते हैं

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केमद्रुम योग कुंडली में, आजमाएं ये उपाय

✨सोमवार का व्रत रखें। साथ ही भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें। ✨सोमवार को हाथ में एक चांदी का कड़ा धारण करें। ✨शुभ मुहूर्त में कनकधारा यंत्र को पूजा स्थल में स्थापित कर प्रतिदिन कनकधारा स्त्रोत का पाठ करें. ✨एकादशी का व्रत रखें। ✨चाँदी का प्रयोग करना चाहिए। ✨पूर्णिमा का व्रत करे। ✨मां की सेवा करे और मातृ समान स्त्रीयो का आशीर्वाद प्राप्त करे। ✨पानी की बर्बादी न करें। ✨गाय का दूध पिएं।। यदि आपकी कुंडली में भी है केमद्रुम योग तो डरिए मत श्रद्धा पूर्वक विश्वास के साथ आप यह उपाय करें भगवान की कृपा से आपको जिनकी कुंडली में यह है योग है उनको खासतौर पर जरूर लाभ होगा। #Durga_Bhawani_Jyotish_kendra #Astrologer_jitendra_saklani

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स्वभाव में बदलाव होने पर करे यह उपाय।।

परिवार में किसी सदस्य का स्वभाव बहुत चिढ़चिढ़ा है या फिर बात-बात पर गुस्सा आ जाता है तो ७ दाने राई के और ७ लाल मिर्च को सात बार उस व्यक्ति के ऊपर से वार लें और फिर उसे आग में डाल दें। साथ ही व्यक्ति को उस आग को देखने के लिए कहते रहें और कुछ समय बाद ही फायदा दिखना शुरू हो जाएगा।

स्वभाव में बदलाव होने पर करे यह उपाय।।  post imageRead full post

आप में से बहुत से लोगों का यह प्रश्न होता है कि घर में गणपति की स्थापना करते वक्त किस और सूंड…

आप में से बहुत से लोगों का यह प्रश्न होता है कि घर में गणपति की स्थापना करते वक्त किस और सूंड किए हुए गणेश जी को घर में स्थापित करना चाहिए तो आइए जानते हैं आपके इस प्रश्न का उत्तर यदि गणेशजी की स्थापना घर में करनी हो तो दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ होते हैं। दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है। किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें तो वह कार्य सफल होता है। शुभ फल प्रदान करता है। इससे घर में पॉजीटिव एनर्जी रहती है व वास्तु दोषों का नाश होता है। घर के मुख्य द्वार पर भी गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है। यहां बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करना चाहिए। बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी विघ्नविनाशक कहलाते हैं। इन्हें घर में मुख्य द्वार पर लगाने के पीछे तर्क है कि जब हम कहीं बाहर जाते हैं तो कई प्रकार की बलाएं, विपदाएं या नेगेटिव एनर्जी हमारे साथ आ जाती है। घर में प्रवेश करने से पहले जब हम विघ्वविनाशक गणेशजी के दर्शन करते हैं तो इसके प्रभाव से यह सभी नेगेटिव एनर्जी वहीं रूक जाती है व हमारे साथ घर में प्रवेश नहीं कर पाती। यहां एक बात बड़ी विचारणीय है कि हम लोग गणपति महोत्सव के दौरान जो गणेश भगवान अपने घर लाते हैं या गणपति पंडाल में लाते हैं उन गणेश भगवान का अंत में हमें विसर्जन करना अनिवार्य होता है क्योंकि उन गणपति भगवान को हम विघ्न विनाशक के रूप में अपने घर में लाते हैं जिन से हम प्रार्थना करते हैं कि हे बप्पा जितने भी दिन आप हमारे घर पर रहे आप हमारे सभी विघ्नों का हरण कर लें। इसीलिए उनकी सूंड बाई और होना शुभ है।

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