प्रात: हाथों के दर्शन क्यों ?
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शास्त्रों में प्रात: जागते ही बिस्तर पर बैठे - बैठे ही सबसे पहले हथेलियों के दर्शन करने को कहा गया है ।
दर्शन के दौरान निम्न श्लोक का उच्चारण करना चाहिए-
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥