जानिए क्या होता है समावर्तन संस्कार ?
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समावर्तन संस्कार विद्यार्थी जीवन समाप्त कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश करन का प्रतीक है ।
ऋग्वेद ( 3 / 8 / 4 ) में कहा गया है कि-
युवा सुवासाः परिवीत आगात् स उ श्रेयान् भवति जायमानः । तं धीरासः कवय उन्नयंति स्वाध्ययो: मनसा देवयंतः । ।
अर्थात :- उत्तम वस्त्र धारी युवा (ब्रह्मचारी) विद्या से विभूषित होकर जब गृहस्थाश्रम में प्रवेश करता है तो मंगल शोभा वाला होता है । उसे धीर ,बुद्धिमान, विद्वान लोग उत्तम ध्यान युक्त मान्य से विद्या प्रकाश की भावना से उच्चासन देते हैं ।
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