क्या आप जानते हैं सगोत्र में विवाह क्यों नहीं करना चाहिये ?
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विवाह से पूर्व गोत्र पूछने की परंपरा सदियों से आज तक चली आ रही है ।
आपने कई बार आज कल की युवा पीढ़ी को यह बात कहते सुना होगा की कुंडली , जात-पात , गोत्र , धर्म , बिरादरी सब कुछ मिलाया जाता है एक रिश्ता बनाने से पहले और कहते हैं की जोड़ियाँ तो उपर वाला बनाता है ! (अब यह बात सही है या गलत मेरा मुद्दा आज यह नहीं है ) परन्तु आज मैं आपको यह बताऊंगा की वास्तविकता में इन सब बातों पर विवाह से पूर्व क्यों विशेष ध्यान दिया जाता है और क्या है इस बात के पीछे का वैज्ञानिक महत्व !
इसके पीछे उद्देश्य यही है कि एक समान गोत्र में विवाह न हो । विवाह सदैव अपने से भिन्न गोत्र में
ही करना चाहिए । शास्त्रों में सगोत्रीय विवाह को निंदित , व धर्मविरुद्ध माना गया है ।
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