क्या आप जानते हैं पत्नी का स्थान वाम अंग में ही क्यों होता है ?
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पौराणिक आख्यानों के अनुसार ब्रह्माजी के दाएं स्कंध से पुरुष की ओर बाएं स्कंध से स्त्री की उत्पत्ति हुई है । यही कारण है कि स्त्री को वामांगी भी कहा जाता है और विवाहोपरान्त उसे पति के बाएं भाग की ओर बैठाए जाने की परम्परा है । यद्यपि सप्तपदी होने पर वधू को दाई ओर बैठाए जाने का विधान है , क्योंकि तब तक वह पत्नी के रूप में पूरी तरह स्थापित नहीं हो चुकी होती । प्रतिज्ञाओं से बद्ध हो जाने के बाद जब स्त्री पत्नी के रूप में पूरी तरह स्थापित हो चुकी होती है तो उसका स्थान पति के दाई ओर से बाईं ओर कर दिया जाता है ।
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