Skip to content
Haridwar, Uttarakhand, 249411

Business hours

DURGA BHAWANI ASTROLOGICAL SERVICES PVT. LTD

Monday
10am-6pm
Tuesday
10am-6pm
Wednesday
10am-6pm
Thursday
10am-6pm
Friday
10am-6pm
Saturday
10am-6pm
Sunday
Not provided

You can anytime during the day with your query.

9634095016

Latest Posts & Updates

Fresh stories, announcements and offers about Consultant, straight from our business.

*विद्या वारिधि बुद्धि विधाता*

इत्येक अक्षरम ब्रह्मा श्रुतियों में ओम को ब्रह्म रूप माना है और धर्म के स्वरूप में ओम स्वयं श्री गणेश है ओमकार चंद्रबिंदु मोदक लड्डू है मात्रा सूंड है ऊपर वाला भाग श्री गणेश का मस्तक और नीचे का भाग उदर है श्री गणेश परब्रह्म है और इन्हीं का घोतक है श्री गणेश में अच्युत (ब्रह्मा विष्णु और महेश) तीनों की शक्ति संबंधित है अतः शक्ति त्रई की प्राप्ति में श्री गणेश परम सहायक हैं *भगवान विनायक की सूंड का महत्व* 6 भुजाओं वाले पीत वर्ण के श्री गणेश जहां समृद्धि के प्रतीक हैं वही चारों भुजाओं वाले रक्तवर्ण श्री गणेश विघ्न विनाशक श्वेत वर्ण युक्त ज्ञान नील वर्ण युक्त उच्च पद प्रतिष्ठा तंत्र मंत्र सिद्धि के कारक हैं श्री गणेश की दाहिनी ओर मुड़ी हुई सूंड पिंगला नामक नाड़ी स्वर का घोतक है जो कि सूर्य विषयक दुष्प्रभावों को कम करती है जबकि बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड चंद्र के दुष्प्रभाव के लिए जलीय रोग आदि का वास करने में सहायक तथा इड़ा नामक नाडी स्वर का प्रतीक है घर में स्थापना के लिए बाईं और की सूंड वाले गणेश जी लाए जाते हैं दाएं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणपति समस्त कामनाओं के सिद्धि प्रदाता होने के कारण सिद्धिविनायक कहे जाते हैं विभिन्न कामना परक भेद से वामावर्तत सूंड वाले गणेश घर में पूजित किए जाते हैं। *छोटी मूर्ति का हो वास* वास्तु दोष शमन, सुख शांति तथा समृद्धि के लिए घर में हथेली भर के श्री गणेश की स्थापना उत्तम है । व्यापार स्थान को छोड़ अन्य स्थानों पर बैठी हुई प्रतिमा की स्थापना की जानी चाहिए व्यापार स्थान पर चल प्रतिमा की स्थापना की जानी चाहिए ! दुर्गा भवानी ज्योतिष केंद्र ज्योतिष आचार्य जितेंद्र सकलानी

Read full post

कुछ अशुभ योग🖤

1)🖤चांडाल योग=गुरु के साथ राहु या केतु हो तो जातकको चांडाल दोष है 2)🖤सूर्य ग्रहण योग=सूर्य के साथ राहु या केतु हो तो 3)🖤चंद्र ग्रहण योग=चंद्र के साथ राहु या केतु हो तो 4)🖤श्रापित योग -शनि के साथ राहु हो तो दरिद्री योग होता है 5)🖤पितृदोष- यदि जातक को 2,5,9 भाव में राहु केतु या शनि है तो जातक पितृदोष से पीड़ित है. 6)🖤नागदोष - यदि जातक को 5 भाव में राहु बिराजमान है तो जातक पितृदोष के साथ साथ नागदोष भी है. 7)🖤ज्वलन योग- सूर्य के साथ मंगल की युति हो तो जातक ज्वलन योग(अंगारक योग) से पीड़ित होता है 8).अंगारक योग- मंगल के साथ राहु या केतु बिराजमान हो तो जातक अंगारक योग से पीड़ित होता है. 9)🖤सूर्य के साथ चंद्र हो तो जातक अमावस्या का जना है 10)🖤शनि के साथ बुध = प्रेत दोष. 11)🖤शनि के साथ केतु = पिशाच योग. 12)🖤केमद्रुम योग- चंद्र के साथ कोई ग्रह ना हो एवम् आगे पीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो तथा किसी भी ग्रह की दृष्टि चंद्र पर ना हो तब वह जातक केमद्रुम योग से पीड़ित होता है तथा जीवन में बहुत ज्यादा परिश्रम अकेले ही करना पड़ता है. 13)🖤शनि + चंद्र=विषयोग शान्ति करें 14)🖤एक नक्षत्र जनन शान्ति -घर के किसी दो व्यक्तियों का एक ही नक्षत्र हो तो उसकी शान्ति करें. 15)🖤त्रिक प्रसव शान्ति- तीन लड़की के बाद लड़का या तीन लड़कों के बाद लड़की का जनम हो तो वह जातक सभी पर भारी होता है 16)🖤कुम्भ विवाह= लड़की के विवाह में अड़चन या वैधव्य योग दूर करने हेतु. 17)🖤अर्क विवाह = लड़के के विवाह में अड़चन या वैधव्य योग दूर करने हेतु. 18)🖤अमावस जन्म- अमावस के जनम के सिवा कृष्ण चतुर्दशी या प्रतिपदा युक्त अमावस्या जन्म हो तो भी शान्ति करें 19)🖤यमल जनन शान्ति=जुड़वा बच्चों की शान्ति करें.

कुछ अशुभ योग🖤 post imageRead full post

*जन्माष्टमी कब है 2 सितंबर की या 3 सितंबर की????*

*==================* *मित्रो धर्मग्रंथो के अनुसार भगवान श्री कृष्णा का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि और बुधवार को हुआ था रोहिणी नक्षत्र में* *पर हर बार ऐसा होता है कई बार की हमको अष्टमी तिथि रात को नही मिल पाती और कई बार रोहिणी नक्षत्र नही हो पाता है* *इस साल भी 2 सितंबर को रविवार 8.48 रात तक सप्तमी तिथि है और उसको बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी और रविवार की रात को ही चंद्रमा भी रोहिणी नक्षत्र में उच्च राशि वर्षभ मे ही है* *तिथि वार और नक्षत्र जो होने चाहिए जन्माष्टमी के लिए वो रविवार की रात्रि को ही है* *इसलिए व्रत पूजन कृष्ण भगवान को झूला झुलाना यह रविवार को ही होगा* *कृष्ण जनमोत्स्व रविवार को मनाया जाना ही सही है* *3 सितंबर को रात को 7.20 से नवमी तिथि है और मृगशिरा नक्षत्र है इसमें कृष्ण भगवान का जन्म नही हुआ है इसलिए 3 सितंबर को कृष्णा जनमोत्स्व मानना शास्त्र सम्मत नही है* *ऋषि व्यास नारद जी से कहते है_______* *सप्तमी तिथि के साथ अगर अष्टमी तिथि भी लग जाय तो* *ऐसे में उस दिन ही व्रत पूजन करना चाहिए* *पर इसमे भी वैष्णव मत वाले लोग जैसे कि मथुरा वृंदावन उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र बिहार यहाँ पर यह लोग उदयकालीन अष्टमी तिथि को ग्रहण करते है रात को चाहे नवमी तिथि होअष्टमी हो या न हो इसलिए कैलेंडर में 3 सितंबर की जन्म अष्टमी लिखी है* *पर कृष्ण भगवान का जन्म रोहिणी नक्षत्र अष्टमी तिथि को हुआ था* *इसलिए श्री कृष्ण #जन्मोत्स्व रविवार को ही मनाना बिल्कुल सही है* *2 सितंबर जन्माष्टमी बिल्कुल सही है रविवार को यह पर्व व्रत करना चाहिए जो सही भी है*

*जन्माष्टमी कब है 2 सितंबर की या 3 सितंबर की????* post imageRead full post

कन्या की विवाह बाधा दूर करने के कुछ अद्भुत उपाय....!!!

आज की व्यस्ततम युग में अनेक माता पिता अभिभावक अपनी कन्या के विवाह हेतु योग्य वर की तलाश में होते हैं कहीं कुंडली नहीं मिलती तो कहीं मनव विचार नहीं मिलते या फिर कहीं दहेज रूपी असुर खड़ा रहता है ग्रहों के अशुभ स्थिति उन का प्रमुख कारण होती है जिन का निदान ग्रहों के उपाय अर्थात जप पूजा दान व्रत व अन्य वैदिक अनुष्ठान के माध्यम से स्वयं कर और किसी योग्य कर्मकांडी ब्राह्मण से भी करा सकते हैं इसी कड़ी में मां मंगला गौरी अर्थात मां पार्वती की आराधना प्रमुख होती है शिव गौरी के पूजन से और उनकी कृपा से कोई भी जातक शीघ्र विवाह के बंधन में बंध सकता है! इस उपाय को पूरी श्रद्धा के साथ करने से विवाह में बाधाएं नहीं आती और शीघ्र विवाह हो जाता है! दुर्गा सप्तशती में मां को प्रसन्न कर हर प्रकार के कार्य सिद्धि के उपाय व मंत्र बताए गए हैं जिन्हें भलीभांति जानकर करने से कोई भी उसका लाभ ले सकता है ऐसे में मां भगवती दुर्गा के *कात्यायनी स्वरूप की पूजा 21 दिन कर निम्न मंत्रों का जाप करें*। *कात्यायनी महामाये महायोगिन्य धीश्वरि।* *नंद गोप सुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः।* शास्त्रों में वर्णित कात्यायनी देवी का अनुष्ठान बड़ा ही सिद्धि प्रद होता है इस मंत्र का श्रद्धा पूर्वक करने से कन्या का विवाह में आने वाली समस्या या विघ्न शीघ्र ही दूर हो जाते हैं वह कन्या का विवाह सकुशल संपन्न हो जाता है *जप की विधि* यह जप सूखे केले के पत्ते के आसन पर बैठकर कमलगट्टे की माला से किया जाता है जप के समय सरसों तेल का दीपक जलते रहना चाहिए जिसको अनुष्ठान करना हो उसे पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए 21 दिन तक 41000 जप का पुरश्चरण करना चाहिए!

कन्या की विवाह बाधा दूर करने के कुछ अद्भुत उपाय....!!! post imageRead full post

जादुई पत्थर सुलेमानी हकीक

कई समस्याओं का सस्ता और मजबूत उपाय. सुलेमानी हकीक के चमत्कारी और अदभुत लाभ 👇👇 1⃣सुलेमानी हकीक जो आपको लोगो की बुरी नजर से बचा कर रखता है । 2⃣आपका व्यवसाय काला जादू या टोना - टोटका की वजह से मंदा चल रहा है तो सुलेमानी हकीक पत्थर उसका काट कर देता है और व्यवसाय में बढ़ोतरी होती है । 3⃣अगर पूर्ण प्रयास के बाद भी घर की उन्नती में बाधाऐं आ रही हैं तो उन्नती के रास्ते खुलने लगते हैं | 4⃣अज्ञात शत्रु आपको परेशान कर रहे हैं या कोई तंत्र-क्रिया आप पर करवा रहे हैं तो उस क्रिया से आपका बचाव करते हुऐ आपके शत्रु को परास्त करता है | उस शत्रु को आपके सामने शक्तिहीन बनाता है | 5⃣अगर आपकी सेहत सही नही रहती है या आपके परिवार में बार-बार कोई बीमार रहता है और दवाऐं भी बेअसर हो रहीं हैं तो उसको सुलेमानी हकीक धारण करवाइऐ उस से सेहत में शीध्र ही काफ़ी अच्छा सुधार होगा 6⃣सुलेमानी हकीक राहु, केतु और शनि द्वारा आ रही बाधाओ को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता मिलने लगती है 7⃣नौकरी, तरक्की, और व्यवसाय में आ रही अनावस्यक अड़चनो को दूर करता है । 8⃣ये पत्थर दुर्घटनाओं में भी स्वयं टूटकर .. पहनने वाले के प्राणों की रक्षा करता है... पहनने की विधि आपको सुलेमानी हकीक शनिवार को, दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में धारण करना है व चाँदी की अंगूठी में बनबाना है | अगर इसको गले में पंचधातु के लॉकेट में धारण कर सकते है तो बहुत अच्छे परिणाम मिलते हैं । विषेश सुलेमानी हकीक को कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता हैं। सुलेमानी हकीक को पंचधातु या चाँदी में बनाकर..शनी, राहु, केतु के मंत्र या देवी मंत्र के जाप और हवन द्वारा अभिमंत्रित कर दिया जाय तो अदभुत परिणाम मिलते हैं।)

जादुई पत्थर सुलेमानी हकीक post imageRead full post

*कुम्भ विवाह या पीपल विवाह*

1.मांगलिक दोष के निवारण के लिए पीपल विवाह, कुम्भ (घड़ा) विवाह, मूर्ति विवाह का भी उपाय बताया जाता हैं ऐसा तब करते हैं जब कन्या की कुंडली में मंगल का स्थान मारक हो या कुंडली में दो विवाह दर्शाता हो, यदि वर की कुंडली में मंगल मारक हो तो ऐसा विधान नहीं बताया गया हैं ऐसा विवाह करते समय यह याद रखे की इसको बहुत गोपनीय ढंग से करे। 2.मांगलिक कन्या को चाहिए की वो कम से कम पांच साल तक मंगला गौरी का व्रत करे, यदि कन्या मांगलिक हो तो ऐसा माना जाता हैं की लड़की का विवाह देखने उसका पिता नहीं बल्कि ताऊ, चाचा, भाई या कोई अन्य रिश्तेदार जाए ऐसे में विवाह के तय होने की संभावना ज्यादा रहती हैं! *दुर्गा भवानी ज्योतिष केंद्र* *"कुंडली परामर्श के लिए संपर्क करे:-* *ज्योतिषाचार्य जितेन्द्र सकलानी* *मो.-9634095016*

*कुम्भ विवाह या पीपल विवाह* post imageRead full post

लोग किराए के मकान में रहते हैं, उनका सिर्फ एक ही सपना होता है कि उनका भी एक छोटा ही सही, लेकिन सु…

लोग किराए के मकान में रहते हैं, उनका सिर्फ एक ही सपना होता है कि उनका भी एक छोटा ही सही, लेकिन सुंदर सा मकान हो। जहां वह निश्चिंत होकर अपने परिवार के साथ रह सकें। 🌸मकान कब बनेगा🌸 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली देखकर यह बताया जा सकता है कि उस व्यक्ति का कभी अपना मकान होगा या नहीं, और यदि होगा तो यह कब बनेगा आज हम आपको कुंडली के उन योगों के बारे में बता रहे हैं, 1. भूमि का कारक ग्रह मंगल है। जन्मपत्री के चौथे भाव से भूमि व भवन सुख का विचार किया जाता है। वैसे तो चौथे भाव के स्वामी (चतुर्थेश) का केंद्र ( कुंडली का लग्न, चौथा, सातवां व दसवां घर) या त्रिकोण ( कुंडली का लग्न, पांचवां व नौवां घर) में होना उत्तम भवन प्राप्ति का योग बनाता है। मंगल के साथ चौथे भाव का स्वामी, पहले भाव का स्वामी व नौवे भाव का स्वामी अच्छी स्थिति में हो व शुभ ग्रहों के साथ हो तो भवन प्राप्ति का अच्छा संकेत है। 2. जन्म कुण्डली के चौथे भाव का स्वामी किसी शुभ ग्रह के साथ 1, 4, 5, 7, 9 व 10 वें भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति को अपनी मेहनत से निर्मित उत्तम सुख-सुविधाओं ये युक्त भवन प्राप्त होता है। 3. जन्मकुण्डली के चौथे भाव का स्वामी (चतुर्थेश) पहले (लग्न) भाव में हो और पहले (लग्न) भाव का स्वामी (लग्नेश) चौथे भाव में हो तो भी ऐसा व्यक्ति अपनी मेहनत से मकान बनाता है। 4. जन्मकुण्डली के चौथे भाव में चंद्र और शुक्र एक साथ हो या चौथे भाव में कोई उच्च राशिगत (उच्च राशि में स्थित ग्रह) हो, चौथे भाव का स्वामी केंद्र-त्रिकोण (1, 4, 5, 7, 9, 10 वें) भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति के पास अपना बंगला या महलनुमा भवन होता है, जिसमें कलात्मक बगीचा या जलाशय होता है।

लोग किराए के मकान में रहते हैं, उनका सिर्फ एक ही सपना होता है कि उनका भी एक छोटा ही सही, लेकिन सु… post imageRead full post

( चन्द्रग्रहण हेतु जानकारी )

खग्रास चन्द्रग्रहण – 31 जनवरी 2018 (भूभाग में ग्रहण समय – शाम 5.17 से रात्रि 8.42 तक) (पूरे भारत में दिखेगा, नियम पालनीय ।) चन्द्रग्रहण बेध (सूतक) का समय सुबह 8.17 तक भोजन कर लें । बूढ़े, बच्चे, रोगी और गर्भवती महिला आवश्यकतानुसार दोपहर 11.30 बजे तक भोजन कर सकते हैं । रात्रि 8.42 पर ग्रहण समाप्त होने के बाद पहने हुए वस्त्रोंसहित स्नान और चन्द्रदर्शन करके भोजन आदि कर सकते हैं । ग्रहण पुण्यकाल जिन शहरों में शाम 5.17 के बाद चन्द्रोदय है वहाँ चन्द्रोदय से ग्रहण समाप्ति (रात्रि 8.42) तक पुण्यकाल है । जैसे अमदावाद का चन्द्रोदय शाम 6.21 से ग्रहण समाप्त रात्रि 8.42 तक पुण्यकाल है । ग्रहण के समय पालनीय (1) ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते । जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए । (2) सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना । यदि गंगा-जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना फलदायी होता है । (3) ग्रहण-काल जप, दीक्षा, मंत्र-साधना (विभिन्न देवों के निमित्त) के लिए उत्तम काल है । (4) ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।

( चन्द्रग्रहण हेतु जानकारी  ) post imageRead full post