लोग किराए के मकान में रहते हैं, उनका सिर्फ एक ही सपना होता है कि उनका भी एक छोटा ही सही, लेकिन सु…
लोग किराए के मकान में रहते हैं, उनका सिर्फ एक ही सपना होता है कि उनका भी एक छोटा ही सही, लेकिन सुंदर सा मकान हो। जहां वह निश्चिंत होकर अपने परिवार के साथ रह सकें।
🌸मकान कब बनेगा🌸 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली देखकर यह बताया जा सकता है कि उस व्यक्ति का कभी अपना मकान होगा या नहीं, और यदि होगा तो यह कब बनेगा आज हम आपको कुंडली के उन योगों के बारे में बता रहे हैं,
1. भूमि का कारक ग्रह मंगल है। जन्मपत्री के चौथे भाव से भूमि व भवन सुख का विचार किया जाता है। वैसे तो चौथे भाव के स्वामी (चतुर्थेश) का केंद्र ( कुंडली का लग्न, चौथा, सातवां व दसवां घर) या त्रिकोण ( कुंडली का लग्न, पांचवां व नौवां घर) में होना उत्तम भवन प्राप्ति का योग बनाता है। मंगल के साथ चौथे भाव का स्वामी, पहले भाव का स्वामी व नौवे भाव का स्वामी अच्छी स्थिति में हो व शुभ ग्रहों के साथ हो तो भवन प्राप्ति का अच्छा संकेत है।
2. जन्म कुण्डली के चौथे भाव का स्वामी किसी शुभ ग्रह के साथ 1, 4, 5, 7, 9 व 10 वें भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति को अपनी मेहनत से निर्मित उत्तम सुख-सुविधाओं ये युक्त भवन प्राप्त होता है।
3. जन्मकुण्डली के चौथे भाव का स्वामी (चतुर्थेश) पहले (लग्न) भाव में हो और पहले (लग्न) भाव का स्वामी (लग्नेश) चौथे भाव में हो तो भी ऐसा व्यक्ति अपनी मेहनत से मकान बनाता है।
4. जन्मकुण्डली के चौथे भाव में चंद्र और शुक्र एक साथ हो या चौथे भाव में कोई उच्च राशिगत (उच्च राशि में स्थित ग्रह) हो, चौथे भाव का स्वामी केंद्र-त्रिकोण (1, 4, 5, 7, 9, 10 वें) भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति के पास अपना बंगला या महलनुमा भवन होता है, जिसमें कलात्मक बगीचा या जलाशय होता है।