*विद्या वारिधि बुद्धि विधाता*
इत्येक अक्षरम ब्रह्मा श्रुतियों में ओम को ब्रह्म रूप माना है और धर्म के स्वरूप में ओम स्वयं श्री गणेश है ओमकार चंद्रबिंदु मोदक लड्डू है मात्रा सूंड है ऊपर वाला भाग श्री गणेश का मस्तक और नीचे का भाग उदर है श्री गणेश परब्रह्म है और इन्हीं का घोतक है श्री गणेश में अच्युत (ब्रह्मा विष्णु और महेश) तीनों की शक्ति संबंधित है अतः शक्ति त्रई की प्राप्ति में श्री गणेश परम सहायक हैं
*भगवान विनायक की सूंड का महत्व*
6 भुजाओं वाले पीत वर्ण के श्री गणेश जहां समृद्धि के प्रतीक हैं वही चारों भुजाओं वाले रक्तवर्ण श्री गणेश विघ्न विनाशक श्वेत वर्ण युक्त ज्ञान नील वर्ण युक्त उच्च पद प्रतिष्ठा तंत्र मंत्र सिद्धि के कारक हैं श्री गणेश की दाहिनी ओर मुड़ी हुई सूंड पिंगला नामक नाड़ी स्वर का घोतक है जो कि सूर्य विषयक दुष्प्रभावों को कम करती है जबकि बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड चंद्र के दुष्प्रभाव के लिए जलीय रोग आदि का वास करने में सहायक तथा इड़ा नामक नाडी स्वर का प्रतीक है घर में स्थापना के लिए बाईं और की सूंड वाले गणेश जी लाए जाते हैं दाएं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणपति समस्त कामनाओं के सिद्धि प्रदाता होने के कारण सिद्धिविनायक कहे जाते हैं विभिन्न कामना परक भेद से वामावर्तत सूंड वाले गणेश घर में पूजित किए जाते हैं।
*छोटी मूर्ति का हो वास*
वास्तु दोष शमन, सुख शांति तथा समृद्धि के लिए घर में हथेली भर के श्री गणेश की स्थापना उत्तम है । व्यापार स्थान को छोड़ अन्य स्थानों पर बैठी हुई प्रतिमा की स्थापना की जानी चाहिए व्यापार स्थान पर चल प्रतिमा की स्थापना की जानी चाहिए ! दुर्गा भवानी ज्योतिष केंद्र ज्योतिष आचार्य जितेंद्र सकलानी