स्त्री में गर्भ के लक्षण स्पष्ट होने पर गर्भस्थ शिशु के उचित विकास के लिए पुंसवन संस्कार किया जात…
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स्त्री में गर्भ के लक्षण स्पष्ट होने पर गर्भस्थ शिशु के उचित विकास के लिए पुंसवन संस्कार किया जाता है । स्त्री के गर्भ में प्राय : तीसरे महीने से शिशु के भौतिक शरीर का निर्माण प्रारंभ हो जाता है । धर्म ग्रंथों में पुंसवन संस्कार के दो प्रमख उद्देश्य बताए गए हैं । पहला उद्देश्य पुत्र प्राप्ति और दूसरा उद्देश्य स्वस्थ , संदर तथा गुणवान संतान की प्राप्ति । पुत्र प्राप्ति के संदर्भ में स्मृति संग्रह में लिखा है –
गर्भाद् भवेच्च पुंसूते पुंस्त्वस्य प्रतिपादनम्
अर्थात् :- इस गर्भ से पुत्र ही उत्पन्न हो , इसलिए पुंसवन संस्कार किया जाता है ।
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