गर्भाधान संस्कार वेदों द्वारा अनुमोदित है । शिशु का भावी जीवन इसी संस्कार पर निर्भर है । इसलिए इस…
Published
गर्भाधान संस्कार वेदों द्वारा अनुमोदित है । शिशु का भावी जीवन इसी संस्कार पर निर्भर है । इसलिए इसका बड़ा महत्व है । इस गर्भाधान संस्कार का उद्देश्य माता - पिता के शारीरिक - मानसिक दोषों से संतान को मुक्त करना है । मनुस्मृति में भी इसे बीज व क्षेत्र की शुद्धि का मुख्य कारक माना गया है । यथा-
निषेकाद्वैजिकं चैनो गार्भिकञ्चापमृज्यते । क्षेत्रसंस्कार सिद्धिश्च गर्भाधानफलं स्मृतम् ॥
अधिक जानकारी के प्राप्ति हेतु नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। 👇