सनातन धर्म अनुसार सूतक/पातक विचार
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सनातन धर्म के आधार पर सूतक एवम् पातक का सम्बन्ध “जन्म एवं मृत्यु के” निम्मित से हुई अशुद्धि से है !
जन्म के अवसर पर जो ""नाल काटा"" जाता है और जन्म होने की प्रक्रिया में अन्यकार की जो हिंसा होती है, उसमे लगने वाले दोष/पाप के प्रायश्चित स्वरुप “सूतक” माना जाता है !
इसी प्रकार
पातक का सम्बन्ध “मरण के” निम्मित से हुई अशुद्धि से है ! मरण के अवसर पर ""दाह-संस्कार"" में इत्यादि में जो हिंसा होती है, उसमे लगने वाले दोष/पाप के प्रायश्चित स्वरुप “पातक” माना जाता है !
हमारे ऊपर आ रहे कष्टो का एक कारण सूतक के नियमो का पालन नहीं करना भी हो सकता है।
इसी प्रकार सनातन धर्म अनुसार किस प्रकार से बताए गए हैं सूतक एवं पातक के नियम ।
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