जानिए क्या माघ पूर्णिमा का महत्व..? कैसे करें पूजा ?
पौराणिक तथा सनातानिय धार्मिक दृष्टि से माघ मास को विशेष स्थान प्राप्त है। भारतीय संवत्सर के आधार पर चंद्रमास का ग्यारहवां और सौरमास का दसवां मास माघ मास कहलाता है। मघा नक्षत्र से युक्त चंद्रमा के पूर्णिमा में उदित होने के कारण इस महीने का नाम का माघ नाम पडा। ऐसी मान्यता है कि इस मास में शीतल जल में डुबकी लगाने वाले पापमुक्त होकर स्वर्ग लोक जाते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा पर स्वंय भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करतें है अत: इस पावन समय में गंगाजल का स्पर्शमात्र भी कर लेने से स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है ।
इसके सन्दर्भ में यह भी कहा जाता है कि इस तिथि में भगवान नारायण क्षीर सागर(दूध का सागर) में विराजते हैं तथा गंगा जी क्षीर सागर(दूध के सागर) का ही रूप है| प्रयाग में प्रतिवर्ष माघ मेला लगता है। हजारों भक्त गंगा-यमुना के संगम स्थल पर माघ मास में पूरे तीस दिनों तक (पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक) कल्पवास करते है। ऐसी मान्यता है कि इस मास में जरूरतमंदों को सर्दी से बचने योग्य वस्तुओं का, जैसे- ऊनी वस्त्र, कंबल और आग तापने के लिए लकडी आदि का दान करने से अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
वैसे तो इस मास की प्रत्येक तिथि पवित्र है.. परन्तु इस वर्ष वाणीभूषण पंचांग के आधार पर 19 फरवरी 2019 को मंगलवार के दिन माघ पूर्णिमा का उत्सव मनाया जाएगा.🙏
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