जानिए केतु के रत्न लहसुनिया की विशेषताएं।
केतु - लहसुनिया
स्वरूप व परिचयः केतु का रत्न लहसुनिया है । इसे भारत के साहित्य में वैदूर्य , विदुररत्न , राष्ट्रक तथा बिडालाक्ष आदि नामों से पुकारा गया है । इस रत्न की चमक बिल्ली की आंख की भांति होती है । अतः इसे आंग्ल भाषा में CAT ' S EYE भी कहा जाता है । इस रत्न के मध्य एक चलती - फिरती रेखा या सूत भी बिल्ली की आंख की भाति होती है । अतः इसे ' सूत्रमणि ' भी कहा जाता है । यदि यह सूत न हो तो उस रन को । लहसुनिया न कहकर कर्केत कहते हैं । इसका रंग पीली हरी आभा वाला होता है । भूरा रंग लिया हुआ लहसुनिया भी होता है । पीला लहसुनिया जिसमें सीधी सफेद रेखा पड़ी है उत्तम माना गया है । 2½ सूत पड़ा लहसुनिया ( जो अतिदुर्लभ है ) सर्वश्रेष्ठ माना गया है । बिन्दुओं / धब्बों वाला , कांतिहीन , जाले वाला या खंडित लहसुनिया दोष युक्त होता है । अतः यह धारणीय नहीं है ।
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