मंदिर का निर्माण अत्यावश्यक क्यों ?
नमस्कार मित्रों , मैं जितेन्द्र सकलानी एक बार पुन: प्रस्तुत हुआ हूँ आप लोगो के समक्ष अपने नए ब्लॉग के साथ अपने धर्मग्रंथो पर आधारित कुछ बताये गए वाक्य, अथवा नियमो के विषय में कुछ जानकरी लेकर....
आज कल के घटनाकर्म को देखते हुए आप लोगो को भी सुनने में आ रहा होगा की कुछ मंदबुद्धि अपने स्वछंद विचारों को ऐसे प्रस्तुत कर रहे हैं की वह ना केवल आस्था के उद्देश्य से अपितु धर्मभाव के न्याय से भी अनैतिक ही माना जायेगा उन मूढ मतियों का कहना है की मंदिर सर्वदा के लिए बंद हो जाने चहिए ! मंदिर बंद कर देने से भी क्या होगा वह सर्वव्यापी परमात्मा तो सभी जगह व्याप्त है ! और जिन्होंने मंदिरों के निर्मांण की नीभ रखी वो हमारे पूर्वज भक्ति और श्रद्धा में , नियमों में हमसे कई गुणा जागरूक भी थे तो उन्होंने मंदिरों का निर्मांण किया ही क्यूँ ? ऐसे ही प्रश्नों का जवाब मैंने इस ब्लॉग में अपने मतानुसार लिखा है -
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